एम. चिन्नास्वामी स्टेडियम भारत के सबसे प्रसिद्ध क्रिकेट मैदानों में से एक है। यह स्टेडियम कर्नाटक की राजधानी बेंगलुरु में स्थित है और अपनी बल्लेबाज़-अनुकूल पिच, छोटे बाउंड्री साइज और हाई-स्कोरिंग मैचों के लिए दुनियाभर में जाना जाता है। आईपीएल हो या इंटरनेशनल क्रिकेट, यहां अक्सर रन वर्षा देखने को मिलती है।
इस लेख में हम आपको एम. चिन्नास्वामी स्टेडियम की पिच रिपोर्ट, IPL रिकॉर्ड, T20 आँकड़े, ODI रिकॉर्ड और Quick Stats Overview विस्तार से बताएंगे।
एम. चिन्नास्वामी स्टेडियम का परिचय
एम. चिन्नास्वामी स्टेडियम की स्थापना 1969 में हुई थी और यह कर्नाटक राज्य क्रिकेट संघ (KSCA) का मुख्य मैदान है। यह मैदान खासतौर पर IPL टीम रॉयल चैलेंजर्स बैंगलोर का घरेलू मैदान है। यह स्टेडियम अपनी ऊँचाई (altitude), तेज आउटफील्ड और छोटी बाउंड्री के कारण बल्लेबाज़ों के लिए स्वर्ग माना जाता है। यहां अक्सर 180+ और 200+ स्कोर बनते हैं।
| पैरामीटर | विवरण |
| स्थान | बेंगलुरु, कर्नाटक |
| स्थापना वर्ष | 1969 |
| बैठने की क्षमता | लगभग 40,000 दर्शक |
| होम टीम | रॉयल चैलेंजर्स बैंगलोर |
| पिच प्रकार | बैटिंग फ्रेंडली |
| सबसे छोटी बाउंड्री | लगभग 56 मीटर |
| सबसे लंबी बाउंड्री | लगभग 65 मीटर |
| औसत IPL पहली पारी स्कोर | लगभग 167 रन |
| फ्लडलाइट्स | उपलब्ध |
| एंड्स के नाम | Pavilion End, BEML End |
एम. चिन्नास्वामी स्टेडियम पिच रिपोर्ट

चिन्नास्वामी की पिच को लंबे समय से बैटिंग पैराडाइज माना जाता है। विशेषज्ञों के अनुसार, यह मैदान टी20 में बल्लेबाज़ों को खुलकर खेलने का मौका देता है। यहां की खासियतें हैं:
- छोटी बाउंड्री
- तेज आउटफील्ड
- गेंद बल्ले पर अच्छी तरह आती है
- हाई-स्कोरिंग मैचों की भरमार
मैच के दौरान पिच का व्यवहार
एम. चिन्नास्वामी स्टेडियम की पिच मैच के अलग-अलग चरणों में अलग तरीके से व्यवहार करती है। शुरुआत में गेंदबाज़ों को मदद मिलती है, लेकिन जैसे-जैसे मैच आगे बढ़ता है, बल्लेबाज़ हावी होने लगते हैं।
1) शुरुआती ओवर
मैच की शुरुआत में नई गेंद सख्त और चमकदार होती है, जिससे तेज गेंदबाज़ों को हल्की स्विंग और सीम मूवमेंट मिलती है। अगर मौसम में नमी हो, तो गेंद और भी खतरनाक बन सकती है। इसलिए शुरुआती ओवरों में बल्लेबाज़ों को सावधानी से खेलना पड़ता है और विकेट गिरने की संभावना ज्यादा रहती है।
2) मिडिल ओवर
मिडिल ओवर तक आते-आते पिच पूरी तरह सेट हो जाती है और गेंद बल्ले पर अच्छे से आने लगती है। इस चरण में बल्लेबाज़ स्ट्राइक रोटेट करते हुए बड़े शॉट खेलने लगते हैं। रन गति धीरे-धीरे बढ़ती है और गेंदबाज़ों के लिए दबाव बन जाता है, खासकर छोटी बाउंड्री के कारण।
3) अंतिम ओवर
डेथ ओवर में बल्लेबाज़ पूरी तरह आक्रामक मोड में आ जाते हैं और हर गेंद पर बड़े शॉट लगाने की कोशिश करते हैं। भले ही स्पिनर्स को हल्की मदद मिले, लेकिन छोटी बाउंड्री और तेज आउटफील्ड के कारण बल्लेबाज़ी आमतौर पर आसान रहती है और स्कोर तेजी से बढ़ता है।
IPL रिकॉर्ड – एम. चिन्नास्वामी स्टेडियम
यह मैदान IPL इतिहास के सबसे रोमांचक मैचों का गवाह रहा है।
| रिकॉर्ड | आँकड़े |
| कुल मैच | लगभग 96+ |
| पहले बल्लेबाज़ी जीत | 41 |
| दूसरी बल्लेबाज़ी जीत | 51 |
| नो रिजल्ट | 4 |
| औसत पहली पारी स्कोर | लगभग 168 |
IPL में बड़े रिकॉर्ड
| रिकॉर्ड | विवरण |
| सबसे बड़ा टीम स्कोर | 287/3 (SRH vs RCB, 2024) |
| सबसे कम स्कोर | 82 (RCB vs KKR, 2008) |
| सबसे बड़ा व्यक्तिगत स्कोर | 175* — क्रिस गेल |
| सर्वश्रेष्ठ गेंदबाज़ी | 4/9 — सैमुअल बद्री |
T20 अंतरराष्ट्रीय रिकॉर्ड
| रिकॉर्ड | आँकड़े |
| कुल मैच | 10 |
| पहले बल्लेबाज़ी जीत | 4 |
| दूसरी बल्लेबाज़ी जीत | 5 |
| नो रिजल्ट | 1 |
| औसत पहली पारी | 148 रन |
| औसत दूसरी पारी | 138 रन |
T20I हाईलाइट्स
| रिकॉर्ड | विवरण |
| सर्वोच्च स्कोर | 212/4 |
| सबसे बड़ा रन चेज | 194/3 |
| न्यूनतम डिफेंडेड स्कोर | 146 |
ODI रिकॉर्ड
वनडे क्रिकेट में भी यह मैदान काफी हाई-स्कोरिंग रहा है।
| रिकॉर्ड | विवरण |
| सबसे बड़ा स्कोर | 410/4 — भारत vs नीदरलैंड |
| सबसे बड़ा रन चेज | 329/7 — आयरलैंड vs इंग्लैंड |
| सबसे बड़ा व्यक्तिगत स्कोर | 209 — रोहित शर्मा |
यहां कैसा स्कोर सुरक्षित माना जाता है?
अगर टीम 200 के आसपास पहुंच जाए, तो जीत की संभावना काफी बढ़ जाती है।
| फॉर्मेट | अच्छा स्कोर |
| T20 | 180+ |
| IPL | 185–200 |
| ODI | 300+ |
निष्कर्ष
एम. चिन्नास्वामी स्टेडियम भारत के सबसे रोमांचक क्रिकेट मैदानों में से एक है। इसकी पिच बल्लेबाज़ों के लिए बेहद अनुकूल है और यहां अक्सर रन बरसते हैं। छोटी बाउंड्री और तेज आउटफील्ड मैच को हाई-स्कोरिंग बनाते हैं। हालांकि नई गेंद से गेंदबाज़ों को थोड़ी मदद मिलती है, लेकिन जैसे-जैसे मैच आगे बढ़ता है, बल्लेबाज़ पूरी तरह हावी हो जाते हैं। IPL, T20I और ODI, तीनों फॉर्मेट में यह मैदान रोमांच और बड़े स्कोर के लिए जाना जाता है।
FAQs
Q1. एम. चिन्नास्वामी स्टेडियम की पिच बल्लेबाज़ों के लिए कैसी है?
एम. चिन्नास्वामी स्टेडियम की पिच आमतौर पर बल्लेबाज़-अनुकूल मानी जाती है। यहां गेंद बल्ले पर अच्छी तरह आती है और छोटी बाउंड्री के कारण बड़े शॉट खेलना आसान रहता है। इसलिए इस मैदान पर अक्सर हाई-स्कोरिंग मैच देखने को मिलते हैं।
Q2. क्या इस मैदान पर टॉस जीतकर पहले गेंदबाज़ी करना सही रहता है?
अधिकांश टी20 और IPL मैचों में कप्तान टॉस जीतकर पहले गेंदबाज़ी चुनना पसंद करते हैं। इसका कारण दूसरी पारी में ओस का असर और आसान रन चेज है। हालांकि पिच की स्थिति और मौसम के अनुसार फैसला बदल भी सकता है।
Q3. एम. चिन्नास्वामी स्टेडियम में T20 मैच में अच्छा स्कोर कितना माना जाता है?
इस मैदान पर T20 या IPL में 180+ स्कोर को प्रतिस्पर्धी माना जाता है, जबकि 200 के आसपास पहुंचने पर टीम की जीत की संभावना काफी बढ़ जाती है। छोटी बाउंड्री के कारण यहां बड़े स्कोर का पीछा भी सफलतापूर्वक किया गया है।
Q4. क्या गेंदबाज़ों को भी इस पिच पर मदद मिलती है?
शुरुआती ओवरों में नई गेंद से तेज गेंदबाज़ों को हल्की स्विंग और सीम मूवमेंट मिल सकती है। वहीं मैच आगे बढ़ने पर स्पिनर्स को थोड़ा टर्न मिलता है। फिर भी कुल मिलाकर यह मैदान बल्लेबाज़ों के लिए ज्यादा अनुकूल माना जाता है।
Q5. एम. चिन्नास्वामी स्टेडियम हाई-स्कोरिंग क्यों माना जाता है?
इस मैदान की छोटी बाउंड्री, तेज आउटफील्ड और सपाट पिच हाई-स्कोरिंग मैचों की मुख्य वजह हैं। इसके अलावा बेंगलुरु की ऊँचाई के कारण गेंद हवा में दूर जाती है, जिससे छक्के ज्यादा लगते हैं और रन तेजी से बनते हैं।


